
प्यार और अँधेरा,
दोनों एक,
दोनों एक,
मगर फर्क इतना कि
दोनों बहते हैं जीवनधारा के
दो किनारे बनकर
जिनको मिलना ही है
दोनों बहते हैं जीवनधारा के
दो किनारे बनकर
जिनको मिलना ही है
किसी न किसी मोड़ पर !
जो शुरू हो जाते हैं
दिलों के जुड़ते ही.
और ऊंचे होते हैं
अरमानो के मचलने से
एहसासों के सिसकने तक
तन्हाई सी दुपहरियो से
एहसानों के घुमड़ने तक,
बस घुलती है स्याही और
दिलों के जुड़ते ही.
और ऊंचे होते हैं
अरमानो के मचलने से
एहसासों के सिसकने तक
तन्हाई सी दुपहरियो से
एहसानों के घुमड़ने तक,
बस घुलती है स्याही और
बहती जाती है
आँखों से...
जब मिलते हैं
प्यार और अँधेरा...
जब मिलते हैं
प्यार और अँधेरा...
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