Monday, March 24, 2025

उत्तरकाशी: एक पर्वतीय द्वीप, एक टीस


बीती १ ५-१६ जून को अतिवृष्टि से आई दैवीय आपदा ने उत्तराखंड में हजारों जिंदगियां छीन ली थी और इस विभीषिका ने कितनी ही जिंदगियां बदल भी दी थी. ऐसी ही एक ज़िन्दगी मेरी भी थी! घर में बैठ कर टीवी पर देखना जब असह्य हो गया तो निर्णय लिया की जाना है उत्तराखंड, जल्द से जल्द! जिस से भी साथ चलने को कहा, सराहना तो मिली और आश्वासन भी मगर साथ न मिला। सो चार मित्रों का एक दल अपने अपने काम धंधे छोड़ कर  तैय्यारी में लग गय।
यह एक मुश्किल निर्णय था, एक और अपने काम की ज़िम्मेदारिया दुसरे परिवार में स्वयं ही अकस्मात् उत्पन्न हो गयी घोर असुरक्षा और चिंता।  माता -पिता,  पत्नी सबकी ना थी, क्योंकि उत्तराखण्ड उस वक़्त हालात बहुत विकट थे और  जो जानकारियाँ छन कर बाहर आ पा रही थी वह भयावह थी। बहुत मुश्किल हुई मगर परिवार ने देशसेवा के नाम पर आखिरकार जाने की अनुमति दे ही दी.


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